1. संस्‍था की संक्षिप्‍त जानकारी (About US)

  • राज्‍य की आवासीय समस्‍या के निराकरण हेतु दिनांक 24 फरवरी 1970 को राजस्‍थान आवासन मण्‍डल एक्‍ट संख्‍या-4, वर्ष 1970 के अन्‍तर्गत राज्‍य सरकार द्वारा मण्‍डल की स्‍थापना की गई थी वर्तमान में मण्‍डल का मुख्‍यालय जयपुर एवं वृत कार्यालय जयपुर, जोधपुर, अलवर, कोटा, उदयपुर एवं बीकानेर में स्थित है।
     
  • राजस्‍थान आवासन मण्‍डल ने पिछले 44 वर्षों में राज्‍य के 64 शहरों / कस्‍बों में माह सितम्‍बर, 2014 तक उच्‍च आय वर्ग (HIG) के 21514, मध्‍यम आयवर्ग-ब (MIG-B) के 35331 मध्‍यम आयवर्ग-अ (MIG-A) के 40522 अल्‍प आय वर्ग (LIG) के 66920 एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर आयवर्ग (EWS) के 78662 कुल 242949 आवासों का निर्माण शुरू कर कुल 230678 आवास पूर्ण किये।
 

राजस्थान आवासन मण्डल का नेटवर्कः

बोर्ड के कार्यकलाप जालौर, करौली जिलों एवं बाड़मेर मुख्यालय को छोड़कर बाकी सभी जिला मुख्यालयों सहित शहरों/कस्बों में विस्तारित है।

  • मण्‍डल द्वारा निर्मित कुल आवासों में से 60 प्रतिशत से अधिक आवास आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग व अल्‍प आय वर्ग के लिये निर्मित कर आवंटित किये गये हैं।
     
  • निर्मित आवासों में से मण्‍डल द्वारा अब तक उच्‍च आयवर्ग (HIG) के 20898 मध्‍यम आयवर्ग-ब (MIG-B) के 33931 मध्‍यम आयवर्ग-अ (MIG-A) के 38977 अल्‍प आयवर्ग (LIG) के 63851 एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर आयवर्ग (EWS) के 76305 कुल 233962 आवासों का आवंटन कर कुल 215533 आवासों का भौतिक कब्‍जा आवंटियों को दिया जा चुका है।
     
  • मण्‍डल द्वारा विकसित की गई सभी योजनाओं में आवश्‍यक मूल भूत सुविधाऐं यथा पक्‍की, सड़क, बिजली, पानी एवं सीवर लाईन, सड़कों पर प्रकाश व्‍यवस्‍था, पार्कों आदि का विकास एवं वाणिज्यिक केन्‍द्र, स्‍कूल, हॉस्पिटल, सामुदायिक केन्‍द्र आदि के लिए स्‍थान आरक्षित किये गये हैं इनमें कुछ योजनाओं में वाणिज्यिक, दुकानें, प्राईमरी स्‍कूल, डिस्‍पेन्‍सरी, सामुदायिक केन्‍द्रों का अपने स्‍तर पर निर्माण किया है तथा वृहद स्‍तर के स्‍कूल, हॉस्पिटल एवं सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण कार्य हेतु विभिन्‍न संस्‍थाओं को भूमि का आवंटन किया जाता हैं।
     
  • राज्‍य सरकार द्वारा मण्‍डल को कोई निधि प्रदान नहीं की गई है तथापि मण्‍डल अपनी आवासीय योजनाओं के क्रियान्‍वयन हेतु हडको (HUDCO) द्वारा वित्‍तीय सहायता लेता रहा है, जिसके लिये राज्‍य सरकार द्वारा प्रतिभूमि प्रदान की जाती है। समय के साथ-साथ आवासन मण्‍डल की समाज एवं राज्‍य में साख बढी हैं और अन्‍य बैंको से ऋण सहायता, स्‍ववित्‍त पोषित योजना के द्वारा, वाणिज्यिक / आवासीय एवं सांस्‍थानिक सम्‍पत्ति के विक्रय प्रतिफल / नीलामी से वित्‍त प्रबन्‍धन किया जा रहा है। आवासन मण्‍डल की वित्‍तीय साख एवं तरलता में वृद्धि के फलस्‍वरूप आवासीय योजनाओं का निर्माण आन्‍तरिक संसाधनों एवं स्‍ववित्‍त पोषित योजनाओं से किया जा रहा हैं। वर्तमान में सिर्फ एक ही बैंक यथा एन.एच.बी.(N.H.B.) का दिसम्‍बर, 2014 के अन्‍त में रूपये 8.85 करोड का ही ऋण शेष है, जिस पर अपेक्षाकृत ब्‍याजदर कम है।